
12वीं बोर्ड टॉपर फर्जीवाड़ा मामला : मेहनत करने वाले छात्रों के साथ विश्वासघात की आखिरकार सजा
484 अंक लाकर बनी थी राज्य टॉपर, जांच में खुला राज—राइटिंग थी ही नहीं उसकी
NTN REPORT// बिर्रा,चांपा,छत्तीसगढ़। वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा में बिर्रा क्षेत्र की छात्रा पोराबाई के नाम से ऐसा परिणाम सामने आया, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा। 500 में 484 अंक प्राप्त कर वह राज्य टॉपर बनी और उसे प्रतिभा का प्रतीक बताया गया। लेकिन यह सफलता मेहनत की नहीं, बल्कि साजिश और छल की नींव पर खड़ी थी।
राइटिंग मैच नहीं हुई, मंडल को हुआ संदेह
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल को जब उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के दौरान राइटिंग (हस्तलेखन) में गंभीर असमानता दिखी, तो मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिका पोराबाई ने स्वयं नहीं लिखी थी। यह न केवल परीक्षा प्रणाली से धोखाधड़ी थी, बल्कि उन हजारों छात्रों के साथ अन्याय था, जो ईमानदारी से पढ़ाई कर अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे।
बम्हानीडीह थाने में अपराध दर्ज, JMFC चांपा में चालान
मामले की गंभीरता को देखते हुए बम्हानीडीह थाना में अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद प्रकरण की चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC), चांपा के समक्ष पेश की गई। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2020 में आरोपियों को निचली अदालत से राहत मिल गई।
अभियोजन की अपील, न्याय की पुनः दस्तक
निचली अदालत के निर्णय से असहमत होकर अभियोजन पक्ष ने अपील दायर की। मामला द्वितीय अपर सत्र न्यायालय के समक्ष पहुंचा, जहां इसकी पुनः सुनवाई हुई।
एडीजे गणेश राम पटेल का कड़ा फैसला
मामले की सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल ने अपील स्वीकार करते हुए आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
फैसले के अंत में न्यायालय ने जो टिप्पणी की, वह पूरे समाज के लिए नैतिक संदेश है—
“आरोपियों ने केवल छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के विरुद्ध अपराध नहीं किया,
बल्कि उन सभी छात्रों के विरुद्ध अपराध किया है
जो अपने भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।”
यह फैसला केवल सजा नहीं, एक चेतावनी है
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़, फर्जी प्रतिभा का निर्माण, मेहनती छात्रों के हक पर डाका ,कभी माफ नहीं किया जा सकता।
न्याय भले देर से मिला, लेकिन यह फैसला साबित करता है कि
झूठ चाहे कितनी ऊंचाई तक पहुंच जाए, एक दिन न्याय उसे बेनकाब करता ही है।
समाज के लिए संदेश
यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो
गलत रास्ते से सफलता पाने का सपना देखते हैं।
मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता—
और जो दूसरों की मेहनत चुराता है,
वह अंततः कानून और समाज दोनों के सामने दोषी ठहरता है।