राम रहीम को 17वीं बार पैरोल मिलने पर सिख पंथ में रोष, जत्थेदार ने सरकारों पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप!
NTN REPORT// बरनाला: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने और लंबे समय से जेल में बंद उन ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई एवं पैरोल के मामलों में कथित देरी को लेकर सिख पंथ में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।

पत्रकारों से बातचीत में जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि एक ओर गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को बार-बार पैरोल देकर जेल से बाहर आने का अवसर दिया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर ऐसे कई बंदी सिंह हैं, जो लंबे समय से जेलों में बंद हैं और जिनके बारे में सिख संगठनों का दावा है कि वे अपनी कानूनी सजा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राम रहीम को बार-बार पैरोल मिल सकती है, तो बंदी सिंहों को उनके अधिकारों से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
बीमार मां से मिलने के लिए भाई जगतार सिंह हवाला को पैरोल देने की मांग
जत्थेदार गड़गज्ज ने भाई जगतार सिंह हवाला का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हैं। जत्थेदार के अनुसार, सिख पंथ के साथ-साथ मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों की ओर से भी मांग की जा रही है कि उन्हें अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाए।
उन्होंने कहा कि बीमार मां और बेटे की मुलाकात मानवीय संवेदना से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थिति में मानवीय आधार पर पैरोल देने पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बंदी सिंहों की रिहाई को लेकर भी उठाए सवाल
जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने भाई बलवंत सिंह राजोआणा, भाई जगतार सिंह तारा, भाई परमजीत सिंह भ्योरा और प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर सहित अन्य बंदी सिंहों की रिहाई के मामलों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने से संबंधित मामला लंबे समय से लंबित है। इसी तरह प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के मामले में भी आवश्यक प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाया गया है। जत्थेदार ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकारों को स्पष्ट नीति के साथ निर्णय लेना चाहिए।
‘दोहरे मापदंड’ खत्म करने की अपील
जत्थेदार गड़गज्ज ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करते हुए कहा कि कैदियों के मामलों में समान और पारदर्शी नीति अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को कानूनी प्रावधानों के तहत पैरोल या राहत दी जाती है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य बंदियों के मामलों पर भी निष्पक्षता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने मानवीय आधार पर भाई जगतार सिंह हवाला को उनकी बीमार मां से मिलने के लिए तत्काल पैरोल देने तथा जिन बंदी सिंहों के बारे में संबंधित पक्षों का दावा है कि उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, उनके मामलों में जल्द निर्णय लेने की मांग की।
नोट: बंदी सिंहों की सजा पूरी होने, रिहाई और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के संबंध में अलग-अलग मामलों की स्थिति भिन्न हो सकती है। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार होता है।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।