ईरान में प्रदर्शन की कीमत: जुड़वां बहनों में एक को मौत की सजा, दूसरी को 27 साल जेल
इस्फ़हान में जनवरी के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार हुईं तारानेह और रोमिना रहीमी पर गंभीर आरोप — परिवार ने यातना और जबरन कबूलनामे का लगाया आरोप, संयुक्त राष्ट्र से मांगी मदद
NTN REPORT// ईरान के इस्फ़हान शहर की रहने वाली जुड़वां बहनों तारानेह रहीमी और रोमिना रहीमी का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। जनवरी 2026 में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने के बाद दोनों बहनों को गिरफ्तार किया गया। अब सामने आया है कि तारानेह को मौत की सजा सुनाई गई है, जबकि रोमिना को 27 साल की जेल की सजा दी गई है। परिवार ने फैसले के खिलाफ अपील की है और ब्रिटेन के मानवाधिकार वकीलों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है।

महत्वपूर्ण: अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में रोमिना की सजा की अवधि 25, 27 और अन्य अवधि के रूप में रिपोर्ट हुई है। हालिया भारतीय रिपोर्टों में 27 साल का उल्लेख है, जबकि कुछ अन्य स्रोतों में 25 साल बताया गया है। इसलिए अंतिम न्यायिक आदेश की प्रति उपलब्ध होने तक सजा की अवधि को लेकर सावधानी जरूरी है।
जनवरी के प्रदर्शनों में शामिल हुई थीं दोनों बहनें
रिपोर्टों के मुताबिक, जनवरी में इस्फ़हान के शोहदा चौक के आसपास बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। तारानेह और रोमिना उस समय करीब 19 वर्ष की थीं और इससे पहले किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई थीं।
प्रदर्शन के दौरान दो लोगों की मौत हुई थी। इनमें एक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का सदस्य और एक बेघर व्यक्ति शामिल था। इसके बाद इस मामले में कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया।
घर से उठा ले जाने के बाद चार महीने तक नहीं मिली जानकारी
परिवार के मुताबिक, प्रदर्शन के कुछ समय बाद नकाबपोश लोग दोनों बहनों को उनके घर से उठा ले गए। परिवार को काफी समय तक यह जानकारी नहीं दी गई कि दोनों को कहां रखा गया है।
उनकी मां मरजिया नूरमोहम्मदी ने लगभग चार महीने तक अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों और जेलों के चक्कर लगाए। बाद में परिवार को जानकारी मिली कि दोनों बहनें दौलताबाद जेल, इस्फ़हान में बंद हैं।
मां ने जेल में बेटियों को देखा तो पहचानना मुश्किल हो गया
मई में जब मां को दोनों बहनों से मिलने की अनुमति मिली तो परिवार के अनुसार उनकी हालत देखकर वह उन्हें पहचान तक नहीं पाईं। रिपोर्टों में परिवार के हवाले से कहा गया है कि दोनों के चेहरे सूजे हुए थे और शरीर पर चोटों के निशान थे। उनके हाथ और कोहनी में चोटें थीं तथा सिर के बाल भी उखड़े हुए थे।
परिवार और उनके समर्थकों ने हिरासत के दौरान शारीरिक एवं मानसिक यातना और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। ये आरोप परिवार और मानवाधिकार स्रोतों के दावों पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सभी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों पर लगाए गए गंभीर आरोप
अदालती मामले में आरोपियों पर मोहारेबेह यानी ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ जैसे आरोप लगाए गए। ईरानी कानून में यह ऐसा अपराध है जिसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है।
इसके अलावा आरोपों में सुरक्षाबलों पर हमला, मोलोटोव कॉकटेल तैयार करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, कथित रूप से शासन के खिलाफ प्रचार तथा अन्य अपराध शामिल बताए गए हैं।
परिवार इन आरोपों को खारिज करता है। परिवार का कहना है कि दोनों बहनों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का पर्याप्त सबूत नहीं है और उनके वकीलों को भी मामले की फाइल तक समय पर पहुंच नहीं दी गई।
तारानेह को मौत की सजा, रोमिना को जेल
इस्फ़हान की क्रांतिकारी अदालत की शाखा-1 ने अगस्त के अंत में इस मामले में 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई। तारानेह रहीमी भी इनमें शामिल हैं। अन्य आरोपियों को अलग-अलग अवधि की जेल की सजा दी गई।
रोमिना रहीमी को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में सजा की अवधि अलग-अलग बताई गई है। 25 सितंबर की एक भारतीय रिपोर्ट में 27 साल की सजा का उल्लेख है, जबकि ईरान से जुड़े अन्य स्रोतों में 25 साल तथा एक मानवाधिकार स्रोत में अलग संयुक्त सजा का विवरण दिया गया है। इसलिए इस बिंदु पर न्यायिक आदेश की आधिकारिक प्रति को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
परिवार का दावा—जबरन कबूलनामा कराया गया
परिवार और मानवाधिकार संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया है कि हिरासत के दौरान दोनों बहनों पर दबाव बनाया गया और उनसे कथित तौर पर जबरन कबूलनामे लिए गए। एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि तारानेह पर उनकी बहन को यौन हिंसा की धमकी देकर बयान देने का दबाव बनाया गया।
इन आरोपों के बीच मामला अब अपील के चरण में है। तारानेह के वकील मौत की सजा के खिलाफ कानूनी चुनौती की तैयारी कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग
परिवार ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की गुहार लगाई है। ब्रिटेन के मानवाधिकार वकीलों ने परिवार की ओर से संयुक्त राष्ट्र के समक्ष मामले से संबंधित औपचारिक ‘सबमिशन ऑफ इन्फॉर्मेशन’ दाखिल किया है। परिवार की मुख्य मांग तारानेह की प्रस्तावित फांसी को रोकने और मामले की निष्पक्ष कानूनी समीक्षा सुनिश्चित करने की है।
घुड़सवारी का शौक था तारानेह को, फैशन में रुचि रखती थीं रोमिना
परिवार के मुताबिक, तारानेह को घुड़सवारी बेहद पसंद थी और वह भविष्य में अपना घुड़सवारी केंद्र खोलना चाहती थी। वहीं उनकी जुड़वां बहन रोमिना को फैशन में दिलचस्पी थी। दोनों बहनें अपनी पढ़ाई के साथ एक जूते की दुकान में पार्ट टाइम काम भी करती थीं।
आज दोनों बहनों की कहानी एक ऐसे मुकदमे से जुड़ गई है, जिसमें एक बहन को मौत की सजा और दूसरी को लंबी जेल की सजा मिली है। परिवार अब अपील और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के जरिए दोनों को राहत दिलाने की कोशिश कर रहा है।
मामले की प्रमुख बातें
- स्थान: इस्फ़हान, ईरान
- मामला: जनवरी 2026 के सरकार विरोधी प्रदर्शन
- बहनें: तारानेह और रोमिना रहीमी
- गिरफ्तारी के समय उम्र: करीब 19 वर्ष
- कुल आरोपी: 16
- तारानेह: मौत की सजा
- रोमिना: हालिया भारतीय रिपोर्ट के अनुसार 27 साल की जेल
- मुख्य आरोप: मोहारेबेह समेत कई गंभीर अपराध
- परिवार का आरोप: हिरासत में यातना और जबरन कबूलनामा
- वर्तमान स्थिति: अपील और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की कोशिश
- संयुक्त राष्ट्र: परिवार की ओर से औपचारिक शिकायत/सूचना प्रस्तुत की गई है।
स्रोत: अंतरराष्ट्रीय मीडिया एवं मानवाधिकार रिपोर्टों के आधार पर एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।